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9:45pm 04-12-2011
ajay
We are all here for some special reason. Stop being a prisoner of your past. Become the architect of your future
10:52pm 01-12-2011
Mohit
If you have something to say ... say it now,
If you have something to give ... give it now,
If you can make someone glad or another less sad,
Do it now ... 'coz, this is the right time...
10:51pm 01-12-2011
Mohit
f you have something to say ... say it now,
If you have something to give ... give it now,
If you can make someone glad or another less sad,
Do it now ... 'coz, this is the right time...
11:32pm 24-11-2011
panchtatva
प्राथ्मिक् विद्यालय, पुरानी मंड़ी में लेखन सामग्री वितरण कार्यक्रम में प्रथम के सतेन्द्र के साथ जाना हुआ | आश्चर्य जनक रूप से एक बेहद बुजुर्ग महिला ने निवदन किया की एक कक्षा उन बुजुर्ग लोगो के लिए भी शुरू की जाए | कितना कुछ हमारी छोटी सी कोशिशे समाज को दे सकती हैं | कितना कुछ है करने को | क्या आपको लगता है की हम लोग अपने सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ती कर रहे हैं ?
8:57pm 23-11-2011
Payal
A man is not poor without a rupee. But man is really poor without a dream and aim.

~Swamy Vivekananda
6:58am 18-11-2011
Payal
Jerry replied, "Each morning I wake up and say to myself, Jerry, you have two choices today. You can choose to be in a good mood or you can choose to be in a bad mood. I choose to be in a good mood. Each time something bad happens, I can choose to be a victim or I can choose to learn from it. I choose to learn from it. Every time someone comes to me complaining, I can choose to accept their complaining or I can point out the positive side of life. I choose the positive side of life."

Too much inspiring story...Worth read... Two Choices
6:56am 18-11-2011
Payal
Jerry replied, "Each morning I wake up and say to myself, Jerry, you have two choices today. You can choose to be in a good mood or you can choose to be in a bad mood. I choose to be in a good mood. Each time something bad happens, I can choose to be a victim or I can choose to learn from it. I choose to learn from it. Every time someone comes to me complaining, I can choose to accept their complaining or I can point out the positive side of life. I choose the positive side of life."

Too much inspiring story...Worth read... http://panchtatva-treasure.blogspot.com/
10:52pm 02-11-2011
ajay
मौन प्रार्थनाए जल्दी पहुँचती हैं इश्वर तक
क्यूंकि वो शब्दों के बोझ से मुक्त होती हैं
11:29pm 26-10-2011
ajay singhal
जज्बों की लौ तेज करो ,ये रात बहुत काली है .
अपने अंतस को रोशन करने का नाम दीवाली है .
सघन अँधेरे पैठ गए है , भीतर अंतस तम में
इन्हीं अंधेरों से लड़ने का नाम दीवाली है .
आने वाली नस्लों के सब ख्याब रहे ज़िंदा
... अपनी किस्मत खुद लिखने का नाम दीवाली है .
धर- आँगन से ज्यादा रोशन दिल-गिमाग हो जब
फिर तो समझो सारा जीवन एक दीवाली है.
12:23pm 26-10-2011
sangam
deepawali ki jyoti aap sabhi par prakash ki baarish kare
9:50am 26-10-2011
Payal
कोई न हो निराश - तो समझो दीवाली है।
पूरी हो सबकी आस - तो समझो दीवाली है।
दिल-दिल से मिलके दीप जले, उसी रौशनी से,
हर घर में हो प्रकाश - तो समझो दीवाली है।
मन में असंख्य सर्पों का ज़हर लिए हुए।
... ... झूठी हँसी दिखाके दान करते हैं दीये।
मीठा न बोल पाए, जीवन में कभी जो,
फिरतें हैं वही हाथों में मिठाइयाँ लिए।
मिटे विरोधाभास - तो समझो दीवाली है।
पूरी हो सबकी आस - तो समझो दीवाली है।
आँखों से बहे आँसू मगर मुस्कान में।
भूखा न सोये कोई कभी इस जहान में।
महलों की रौशनी को खुद छोड़ लक्ष्मी,
कहे झोपड़ी को आकर, चुपके से कान में।
मै आ गई तेरे पास - तो समझो दीवाली है।
पूरी हो सबकी आस - तो समझो दीवाली है।
इंसानियत की बात, हर इंसान में रहे।
सत्मार्ग छोड़के, न कोई लोभ में बहे।
अब तक अलग-अलग रहे, पाए न कुछ भी हम,
मन के कपट भूला के यदि हर कोई कहे।
मुझे तुमपे है विश्वास - तो समझो दीवाली है।
पूरी हो सबकी आस - तो समझो दीवाली है
11:25pm 12-10-2011
ajay
छुटमलपुर, बेहट, कलसिया और चिलकाना जैसे कसबो तक हमारी मुहिम अपना असर दिखा रही है | अगले कुछ ही सालो में पटाखों के विरूद्ध हमारी मुहीम एक बड़ा आन्दोलन बन्ने वाली है, अगर आप भी रखते हैं समाज के लिए कुछ करने का जज्बा तो शामिल हो हमारी इस मुहीम में | इस वर्ष से पटाखों का बहिष्कार
11:48pm 04-10-2011
panchtatva
क्रेजी ग्रीन एवं अठारह अन्य संस्थाए पटाखों के खिलाफ एकत्रित हो गयी हैं , स्कूल के लिए एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्देश्य समाज में इस बात के लिए एक बहस को शुरू करना है की पटाखे छूटाना कितना नुक्सान देय है | इस प्रतियोगिता के विजेताओ को प्रथम दो पुरस्कार के रूप में रुपए ग्यारह सों एवं ट्रोफी , द्वितिय दस पुरस्कार पांच सों रुपए के , त्रितीय बीस पुरस्कार में दो सों पचास रुपये एवं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जायेगा | पिछले साल इस प्रतियोगिता में लगभग चोदह सों बच्चो ने भाग लिया था | भविष्य को बचाने को एक बहस की शुरुआत है ये , निर्णय हम लोगो को करना है |
11:03pm 28-09-2011
ajay singhal
कोई बच्चा पटाखों के कारण अपनी जिंदगी खराब न करे | हर साल देश भर में लगभग दस हज़ार से ज्यादा लोग अपनी आंखे पटाखों के कारण खो देते हैं | और वो सब यही सोचते हैं की हादसा उनके साथ नहीं होगा
11:36pm 26-09-2011
:)
Tu Bhi Saada Hai, Kabhi Chaal Badalta Hi Nahi..
Hum Bhi Saade Hain, Usi Chaal Mai Aa Jatey Hain...
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